
पितरों को नमन, वायु वीरों को वंदन
माटी की खुशबू में जिनकी,
वीर गाथाएँ पलती हैं,
उन पितरों के पुण्य तपों से,
भारत की साँसें चलती हैं।
जिनने हँसकर प्राण लुटाए,
मातृभूमि की शान लिए,
उन अमर शहीदों को नमन है,
तिरंगे का सम्मान लिए।
सरहद पर जो अडिग खड़े हैं,
आँधी से टकराते हैं,
भारत माँ की रक्षा खातिर,
हर संकट सह जाते हैं।
आकाशों में गर्जन करते,
जब वायु वीर उड़ते हैं,
दुश्मन के हर षड्यंत्रों पर,
बिजली बनकर टूटते हैं।
वायु वीरों का शौर्य हमारा,
गौरव है, अभिमान है,
उनके साहस के आगे तो,
नतमस्तक आसमान है।
पितरों की पावन स्मृतियों से,
हमको शक्ति मिलती है,
वीरों के बलिदान से भारत,
हर पल आगे बढ़ती है।
श्रद्धा से सिर झुकता है,
शौर्य को नमन हमारा,
पितरों से लेकर वायु वीरों तक,
जय-जय हिंद हमारा।
तिरंगा यूँ ही ऊँचा लहराए,
गूँजे भारत की जयकार,
वीर जवानों के बलिदानों से,
अमर रहे अपना संसार।
जय हिंद।
रचनाकार —
श्री नंद किशोर गौतम
माध्यमिक शिक्षक
शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बकौडी
विकासखंड कुरई, जिला सिवनी (म.प्र.)













