
एक बात बोलूं साहेब,जो बचपन में शिक्षा प्राप्त कर लेता है फिर उसे जवानी में कभी गरीबी ग्रहण नहीं लगता है,मालूम है क्यों क्योंकि शिक्षा वो कमाई है जो बचपन में
कमां लिया तो फिर उसे जवानी में कभी मजदूरी नहीं करनी पड़ती है,क्योंकि जो बच्चे आज पढने लिखने के लिए बहाना बना लेता है फिर उसे सारी दुनियाँ उम्र भर
मजदूर और बेवकूफ बनाते रहते हैं क्योंकि इस दुनियाँ का यही रीति और रिवाज है फ फिर भी आज कल के बच्चों को कुछ भी समझ में नहीं आता है,मालूम है क्यों क्यों
कि आज अपने पिता जी के होटल में खाना खा रहा है,और मोबाईल चला रहा है शायद उसको लगता है कि यही जीवन है, और ऐसा ही जीवन रहेगा आज का नादान बच्चे यही समझता है,
चन्दे पासवान उर्फ अलबेला जी मधुबनी बिहार से,













