
मुखड़ा
सुबह-शाम की सर्दी आई, बड़ा सुखद अहसास है।
पवन के हर एक झोंके से, आती नई सुबास है।।
धूप सुनहरी आँगन उतरी, ओढ़ सुनहरी चादर,
ओस-बूँद के मोती चमके, पत्तों के तन पर।
ठिठुरी-ठिठुरी भोर सुहानी, मन में मधुर मिठास है।
सुबह-शाम की सर्दी आई, बड़ा सुखद अहसास है।।
हरी-भरी सब्जियाँ आईं, फल-फूलों की बहार,
ताजी खुशबू लेकर आई, ऋतु का सुंदर उपहार।
प्रकृति निखरी रूप नया ले, छाई हरियाली पास है।
सुबह-शाम की सर्दी आई, बड़ा सुखद अहसास है।।
दशहरा लेकर विजय-पर्व की, मंगलमय सौगात,
शरद पूर्णिमा चाँद सजाए, उजली-उजली रात।
करवा चौथ सजे सुहागिन, मन में पावन आस है।
सुबह-शाम की सर्दी आई, बड़ा सुखद अहसास है।।
दीपावली दीप जलाए, जगमग घर-आँगन,
छठ मैया की भक्ति गूँजे, पावन हो हर मन।
पर्वों की यह छटा निराली, जीवन में उल्लास है।
सुबह-शाम की सर्दी आई, बड़ा सुखद अहसास है।।
कोहरे की चादर ओढ़े, गलियाँ और चौबारें,
चाय की प्याली लेकर बैठे, हँसते लोग हमारे।
अलावों की गर्मी बाँटे, रिश्तों में मिठास है।
सुबह-शाम की सर्दी आई, बड़ा सुखद अहसास है।।
ऋतु के संग मन भी गाए, नव उमंग के गीत,
शीतल पवन सुनाए जैसे, मधुर मिलन की प्रीत।
हर जीवन में सुख बरसे, मन की यही आस है।
सुबह-शाम की सर्दी आई, बड़ा सुखद अहसास है।।
डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार













