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एक नारी के कितने नाम

एक नारी के कितने नाम ,
जो हो ही नहीं देती किसी को गुमनाम ।।

कभी फूलों सी कोमल है वो,
तो कभी पत्थर से कठोर है वो।।

बिजली सी गरज हैं वो,
तभी तो प्रतिज्ञा का प्रतीक है वो।

हर घर की शान है वो,
दया ,प्रेम , ममता की मूरत है वो।।

पल-पल रौंदा उसको दरिंदों ने,
तभी तो चंडी का अवतार है वो ।।।

डॉ रूपाली गर्ग
मुंबई महाराष्ट्र

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