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कविता

रवि जाग उठा अलसाई प्रभा
जग को  निरखत कछु हर्षित होकर ,
अरुणाभ छटा जब सोह धरा,
तम भागत है लख लज्जित होकर।
खग गान करें नव चेतन भर,
तरु-पात हिलें सुख-सौरभ ढोकर।
जन- जाग उठे शुभ कर्म हुए,
दिनमान बढ़ा नव आशिष देकर।।

डॉ पुष्पा पाठक छतरपुर मध्य प्रदेश

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