
दादा दादी से स्नेह मिला,
मामी पापा से संस्कार,
बड़ी मां चाचा चाचीयों से मिला दुलार,
ऐसा है मेरा गौरटेक परिवार।
संस्कारों से सुशोभित हैं,
मान सम्मान भरपूर है,
जो भी आए खुश होकर जाएं,
ऐसा है मेरा गौरटेक परिवार।
भैयायों हर कर्तव्य निभाना आप,
जीवन भर रहना हमारे साथ,
भाभी तो सखि सहेली होती,
करते हम हंसी मजाक ठिठोली,
दोनों का महत्व उतना ही है,
दोनों का सम्मान करो,
बेटी अरमान हैं तो बहु घर की रौनक,
बेटी बहु को मिलता प्यार,
ऐसा है मेरा गौरटेक परिवार।
हम बहने है अनेक,
सबकी अदाएं हैं एक से बढ़कर एक,
किसकी गुणगान करूं मैं,
सबकी मुस्कुराहटें लगाती चार चांद,
बहनों की अदाएं लाजवाब हैं,
ऐसा मेरा गौरटेक परिवार है।
मेरे जीजाओ का क्या कहना,
हैं मेरे दीदियों का गहना,
ससुराल का संभालते काम
तभी तो पड़ा आदर्श दामाद का नाम,
हमारे परिवार के सारे बच्चे,
हैं बड़े दिल के सच्चे,
थोड़ी सी शरारती
थोड़ी सी नादानी,
खुशियों से भरा संसार है,
ऐसा मेरा गौरटेक परिवार है।
बुआ और फूफा जी हैं हमारे
मार्गदर्शक,
उनके सलाह होते सर आंखों पर,
उनकी भूमिका अपरंपार है,
ऐसा मेरा गौरटेक परिवार है।
परिवार में हैं तीन नटखट कली,
रिमझिम आसवी और सारांश बाबू,
इतने कारनामे करते,
हो जाते उनकी नानियां दीवानी,
आकर्षक उनके डांस हैं,
ऐसा मेरा गौरटेक परिवार है।
सदा सुखी रहें मेरा परिवार,
हर दुख सुख में रहें साथ,
जीवन का सफर संग बीते उनका,
रखें एक दूजे का ख्याल,
प्रभु से इतनी दुआएं मांगू,
हमेशा खुश रहे ये परिवार,
करूं मैं प्रणाम बारंबार,
ऐसा है मेरा गौरटेक परिवार।
नलिनी शैलेन्द्र दास
सरायपाली छत्तीसगढ़













