Uncategorized
Trending

गज़ल

नई तस्वीरें खिंचे तो
जरूरत पड़ती है हंसाने की ,

आजकल किसी के भी चेहरे पर मुस्कुराहट नहीं होती ,

हजारों चिंताएं होती हैं ज़माने की ,

वो पुरानी तस्वीरें हैं गवाह,
हमारे मुस्कुराने की,

पुरानी तस्वीरें हटाने को दिल नहीं करता,

पुरानी तस्वीरें तो अदा है उस ज़माने की ,

हम हंसते हुए फिदा हुए थे कभी किसी पर,

कभी यह गवाही देंगी हमारे जमाने की ,

न आरज़ू थी न जुक्षजू थी,
न कोई तमन्ना थी,

एक आदत सी बन गई थी बस उसकी गली में जाने की ,

बस एक बार वो मुड़ कर जो देख लेती थी,

समझ लेंते थे हम,

कि हमें दौलत मिल गई सारे ज़माने की।।

अशोक सुमन भवानी मंडी (राज.)

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *