
चंद कागज के टुकड़ो की कीमत पर कई रतजगे हे !
हम भी अपनी तारिफो के पुल बांधने मे लगे हे !
हमारी बुंलदियो का मापदंड यु नापिये श्रोताओ ने हमे अपनी सर आंखो पे बिठा लिया !
कसम से बावले हो गये लोगो ने हमको अपने तालियों के कंधो पे उठा लिया !
अब समजे आप हम किस खेत की मुली मंचो पे हमसे बड़ी नहीं कोई संस्कारहिन बला !
सच कह रहे हुजूर कोई कल्पित किस्सा नहीं मालाओ के बोज से दुखने लगा गला !
लाप्टर किंग हे हम जमाना हमारे कदमो मे अपना अपना सर झुकाता हे !
हास्य के बेताज बादशाह हे हम भगवान स्वंय खुशी से उछल पड़ता हे जब हम जेसे नमुने बनाता हे !
क्या बताये हम ईतने भावनाओ मे बहके की माईक को अपने हाथो मे उठा के घुमाने लगे !
तालियों का महोत्सव हो गया लोग हमको हास्य का हनुमान बताने लगे !
आईये आप भी हमें सुनने देखने आपने पुरे जमाने मे हमसा हंसी का बादशाह नहीं देखा !
हमारी कोम आजकल पुरे हिन्दुस्तान पे राज कर रही हे आप भी देखते होगे बेनर पे लिखा केवल अखिल भारतिय हास्य कवि सम्मेलन हमने सारे रसो को लोगो की मानसिकता से उखाड़ फेंका !
बेचारे साहित्यकार तन्हाईयों के शहर मे मोनव्रत लिये बेठे अब सारे आयोजनो का केवल लाप्टर किंगो को ही दिया जाता हे ठेका !
हमारे कार्यक्रमो से रंगे हुऐ देखिये सारे विश्व के अखबार हे !
ईस पागल की बात पे आजकल कोई ध्यान नहीं देता जाने क्या बकवास लिखता रहता ये भेरु सुनार हे












