
महालया—भक्ति की बेला
महालया की पावन बेला, भक्ति का संचार,
माँ दुर्गा के आगमन से, महके सकल संसार।
भोर हुई, आकाश में छाई, अरुणिम स्वर्णिम आभा,
मंत्रों की पावन ध्वनि ने, मन में जगाई श्रद्धा।
शक्ति-साधना के स्वर गूँजे, गूँजे जय-जयकार,
माँ के चरणों में अर्पित हो, श्रद्धा के उपहार।
महिषासुर-मर्दिनी माँ, जग की पालनहार,
दीन-दुखी के कष्ट हरें, करती भव से पार।
ढाक बजे, शंखनाद हो, गूँजे मंगलगान,
माँ के स्वागत में सजने को, आतुर है जहान।
मन-मंदिर में दीप जलाकर, करें शक्ति का ध्यान,
माँ के आशीषों से महके, हर घर और इंसान।
नवजीवन का संदेश लेकर, आती माँ जगदंबा,
दूर करें अज्ञान-तिमिर को, बनकर दिव्य प्रभा।
महालया की भक्ति में, मन हो निर्मल-धाम,
माँ के चरणों में मिल जाए, सुख-शांति और विराम।
जय माता दी! जय माँ दुर्गा!
डाॅ सुमन मेहरोत्रा’ सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार












