
कविता
हे मां चंद्रघंटा देवी तेरी जय हो मेरी मैया,
हे अम्बे तेरी जय हो तुम जगत को तारणहार हो
बड़ी ही निर्मल मन वाली है मेरी मैया
दस भुजाओं वाली मां अम्बे गौरी मैया,
तीर कमान तलवार त्रिशूल खड़क से शोभित मां मेरी मैया,
कमल कमंडल गदा शंख और माला से अलंकृत है मेरी मैया,
सिंह पर सवार होकर आए हैं मां अम्बे गौरी मैया , बड़ी अद्भुत मतवाली है मेरी मैया,
स्वर्ण सी काया दमकती मंद मंद मुस्कान चेहरे पर सुहाए
बड़ी ही ममता मयी है मेरी मैया ,
भक्त जनों को शरण देने वाली
बड़ी ही रक्षक वरदानी है मेरी मैया,
राक्षसों का संहार किया है मां ने और निर्भय दान दीया धरती को
बड़ी ही दयालु है मेरी मैया,
बड़ी कृपालु महारानी है मैरी मैया,
हे मां तुम चिंता दूर कर देती हो,
चिंता हरणी कहलाती है मैरी मैया ,
नवरात्रि में तीसरे दिन धुप दीप पीले वस्त्र फूल माला,पीले पत्ते, आंवला और मिष्ठान से पुजाती है मेरी मैया।।
अशोक सुमन भवानी मंडी (राज.)













