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जय माँ शारदा


विधा- कुण्डलियां

         माँ स्कंदमाता

पंचम दिन नवरात्रि का, स्कंद मातु का खास।
साधक करते साधना, रखते हैं उपवास।।
रखते हैं उपवास,मातु की महिमा गाते।
करते पूजा पाठ, प्रेम से शीश झुकाते।
माता के दरबार, भक्ति का होता संगम।
मुक्ति मोक्ष का द्वार,मातु का दिन है पंचम।।

लगती लम्बी भीड़ है,माता के दरबार।
दीन हीन हर जीव की, सुनतीं मातु पुकार।।
सुनतीं मातु पुकार,दया सब पर हैं करतीं।
देकर शुभ वरदान,गोद बाँझन की भरतीं।
चढ़े नारियल फूल,ज्योति माँ द्वारे जलती।
मनमोहक छवि मातु,बड़ी ही प्यारी लगती।।

अम्बा का ही रूप हैं,वीर षडानन मात।
स्कंदमातु के नाम से, दुनिया में विख्यात।।
दुनिया में विख्यात,मातु की महिमा न्यारी।
देवों के भी देव, शंभु की प्राण पियारी।
जनता के हित हेतु, रूप धरतीं जगदम्बा।
मिटा धरा से पाप, सुमंगल करतीं अम्बा।।

माता हैं मैनावती,पितृ हैं पर्वतराज।
स्कंदमातु के रूप में,पूजे सकल समाज।।
पूजे सकल समाज,देव भी महिमा गाएं।
कमल सुशोभित हाथ, लिए सुत गोदी बाएं।
पंचम दुर्गा रूप,मोक्ष सुख की हैं दाता।
ममता की प्रतिमूर्ति,जगत कहता है माता।।

राम जी तिवारी”राम”
उन्नाव (उत्तर प्रदेश)

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