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दीवाली की सफाई, मेरी शामत आई


विधा : हास्य कविता
रचनाकार सुनील कुमार खुराना नकुड़ सहारनपुर उत्तर प्रदेश

भैया दीवाली का त्योहार आया,
यह त्योहार सबके मन को भाया।
करते हैं सब दीवाली की सफाई,
साथ न दे पत्नी मेरी सामंत आई।।

घर में मै एक अकेला ऐसा बैल हूं,
दिन-रात मै कोल्हू में चलता रहता।
सब कुछ सहता पर कुछ न कहता,
सच्चा मै मन का समझों तुम भाई।।

ऐसा घर में हूं मैं जैसे खेत में ठेला,
घर में करते है मुझे दिन-रात पेला।
करते सब साथ मेरे हर पल खेला,
जानूं सब मैं सच्चे लक्ष्य का राही।।

घर में मेरी पत्नी हो या फिर बच्चें,
मन मर्जी के काम ना करते अच्छे।
वह बेमतलब के करते सब खर्चे,
हो जाते सब एक उठती ना ढ़ाई।।
स्वरचित और मौलिक कविता
सर्वाधिकार सुरक्षित
सुनील कुमार खुराना
नकुड़ सहारनपुर उत्तर प्रदेश

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