
विधा : पद्य
हास लिखो परिहास लिखो ,
एहसास व इतिहास लिखो ,
जमाने का हर प्यास लिखो ,
असहायों के हर श्वास लिखो ।
जन जन जीवन ये जी सकें ,
अपमानों के घूॅंट न पी सकें ,
टूटा समाज अबतक जो भी ,
फटे चिथड़े को भी सी सकें ।
तिमिर संग ये प्रकाश लिखो ,
परित्राणों के हर त्रास लिखो ,
धरणी से ले आकाश लिखो ,
आस प्यास मधुमास लिखो ।
खेल सुंदर ही हम खेल सकें ,
संग ही दुःख सुख झेल सकें ,
दबे कुचले को हम ले उठाऍं ,
असहायों को न धकेल सकें ।
युग युग का तुम खास लिखो ,
कौन किसका है दास लिखो ,
संरचना और विनाश लिखो ,
मिला न च्यवनप्राश लिखो ।
अरुण दिव्यांश
छपरा ( सारण )
बिहार ।












