
देखों देखों आई दिवाली
घर आंगण सजे दिखे,
सुंदर आकार दीपक से,
जगमगाती खुशहाली ,
नई उमंग नया सवेरा,
जीने की राह दिखलाती,
देखों देखों आई दिवाली।
रंगबिरंगे फल-फूलों से,
नव उमंग जीवन में भरे,
रंगबिरंगी दीप के उजालों से,
घर सुनहरा प्यारा दिखे,
देखों देखों आई दिवाली।
चमकते लाइटों के रोशनी से,
सुंदर पवन इठलाते,
धरती अंबर एक दिखे,
पेड़ पौधों को नई दिशा मिलें,
जिवन में रोशनी की सीख सिखलाती,
देखों देखों आई दिवाली..।
दुर्वा दुर्गेश वारीक ‘गोदावरी’
गोवा










