
लक्ष्मी जी घर-घर पधारें
स्वागत करें दीप जला कर
सुवासित कर लें घर-घर सजा कर
ज्योतिर्मय हो घर की मुंडेर
लक्ष्मी का पदार्पण हो
धन वर्षा करें कुबेर ।
घर-घर से हटे द्ररिद्रता
रघुकुल-सा राज मिले
सिया-राम सा धर्म निभे …
धरती के कण-कण समाए शुचिता।
आशीष मिले… संग रहें पार्वती नन्दन श्री गणेश
आसुरी शक्तियों का हो अंत
जन-जन के हिय बसें–
श्रीराम चन्द्र अवधेश ।
जग में सुभिक्ष हो
जल-वायु-आकाश-धरा
चहुं दिस संदेश मिले– प्रेमोपहार भरा
प्रेम का संगीत सुनाएं… भ्रमर-पक्षी इस धरा ।
महेश शर्मा--करनाल











