
बस मुझे संघर्ष करने दो
जिंदगी जी ऐसे मैंने,जैसे चमन का प्रसून।
काँटों संग उलझी रही ,मुस्कुराती रही जान।
अपने जीवन को संघर्ष का खेल जाना।
उतार चढ़ाव की ज़िंदगी को रेल जाना।
अपनी सिफ़त से ही मिली मंजिल,
चमके जो बुलंदी का सितारा उसे मेल माना।
बस मुझे संघर्ष करने दो,
मैं खुद को साबित करूंगी,
हर मुश्किल को पार करूंगी,
और अपने सपनों को पूरा करूंगी।
मैं हार नहीं मानूंगी,
मैं संघर्ष करतीरहूंगी,
अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए,
मैं हर चुनौती को स्वीकार करूंगी।
मैं अपने आप पर विश्वास करती हूं,
और अपने सपनों पर भी,
मैं संघर्ष करता रहूंगी,
और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करूंगी।
बस मुझे संघर्ष करने दो,
मैं अपने आप को साबित करूंगी,
और अपने सपनों को सच करने के लिए,
मैं हर संभव प्रयास करूंगी।
स्वरचित
डाॅ सुमन मेहरोत्रा
मुजफ्फरपुर, बिहार













