
(श्रम शक्ति)
एक मई का दिन है, मजदूरों के नाम l
जो आए इस देश की प्रगति के सदा काम ll
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हज़ारों नए स्तंभ जुड़े आज़ाद भारत में l
नयी नयी ऊंचाइयां मिली देश के आंगन में ll
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आओ हम सब भी सोचें, कैसे जीवन हो इनका खुशहाल l
इन्हें मिले घर आंगन, और बदल सके इनके हालचाल ll
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नयी तकनीक बने इनके जीवन का सार l
प्रगति और समरसता का संदेश बने इनके जीवन का आधार ll
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नए अनुसंधानों के वारिस बनें
इनके भी नौनिहाल l
उनका हुनर भी आ सके देश के काम, ऐसी हो देखभाल ll
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जिस ऊर्जा और उम्मीद से रंग बदलता है ये समाज l
है मुमकिन जब मेहनतकश, प्रण लेकर करता है आग़ाज़ ll
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कई उदाहरण है समाज में जब जब आई क्रांति l
ऐसी ही उम्मीदें हैं भारत को तभी मिलेगी शांति ll
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वेद, पुराण, गीता, रामायण, ग्रंथ सबमें है संदेश यही l
कोई नहीं है छोटा बड़ा, मिलजुल कर रहें, यही है सही ll
सरोज बाला सोनी
कवयित्री












