देखो सर्दी का मौसम आया है,
ठंड से ठिठुरते लोगों को पाया है।
किसी को अलाव तापते देखा है,
कहीं किसी ने खाने का शमा़ बांधा हैं।।
किसी को इडली,डोसा,पकौडे़ का चाव है,
हमको चटपटी सब्जियों से लगाव है।
जब ठंड से कांपते कांपते घर गया,
बहुत सी सब्जियां अपने संग ले गया।।
जानू गर्मागर्म गाजर का हलवा बनाना,
मटर,धनिया,गोभी डाल पुलाव बना देना।
इस ठंड से मुझको मुक्ती दिला देना,
बस मिल जाए तेरे हाथ से बना खाना।।
ग़र हो सके तो बना बैगन का भूर्ता,
संग हो भुज्जी व आलू का परांठा।
सब्जियों से पौष्टिक आहार मिलता है,
हमारा सारा जीवन फलता फूलता हैं।।
मुन्ना राम मेघवाल।
कोलिया, डीडवाना,राजस्थान।












