
आज फिर उस पल को याद कर बैठा हूँ,
ख़ामोशी में खुद को ही दोष दे बैठा हूँ।
क्यों मिला था वो मेरी राहों में कभी,
यही सवाल दिल से पूछ बैठा हूँ।
सोचा था भूल जाऊँगा एक दिन उसे,
पर हर कोशिश में हार कर बैठा हूँ।
उसकी धुंधली-सी तस्वीर आँखों में है,
उसी को देख कर रात भर जाग बैठा हूँ।
धड़कनों की रफ़्तार संभलती ही नहीं,
साँसों में एक अजीब-सी आग ले बैठा हूँ।
कसूर उसका था या मेरी तक़दीर का,
फैसला करते-करते थक बैठा हूँ।
आर एस लॉस्टम












