
शीर्षक-अर्जुन का विषाद (सांख्य योग)
अर्जुन का है विषाद महान,
रथ के मध्य खड़े हैं मौन।
तब बोले कमल नयन भगवान,
मोह छोड़ कर सुन ले कान।
सुनो यह देह नश्वर है, पार्थ!
आत्मा अजर अमर है,पार्थ!
न शस्त्र इसे काट सकते हैं,
न अग्नि इसे जला सकती है।
दुःख-सुख, लाभ-हानि में,
जो जन रहता है सदा धीर।
वही स्थिति प्रज्ञा का ज्ञानी,
जिसकी बुद्धि है स्थिर ।
कर्म किए जा, फल की चिंता,
मन में कभी न लाना तू।
यही योग है, यही कौशल है,
जीवन का मार्ग बनाना तू।
गीता ज्ञान का सार यही है,
हर युग की पहचान यही है,
कर्मण्येवाधिकारस्ते का,
देती यह शुभ संदेश है।
मोह माया के बंधन तोड़,
धर्म की राह दिखाती है,
जीवन के हर प्रश्न का,
यह अद्वितीय उत्तर कहलाती है।
रीना पटले (शिक्षिका)
शास हाई स्कूल ऐरमा (कुरई)
जिला - सिवनी (मध्यप्रदेश)












