
आज हर इंसान तनिक
डरा हुआ सा रहता है,
लगता है हर समय
कोई निगरानी करता है।
मोबाइल में ऑनलाइन
खरीददारी में डर लगता है।
किसी से बात करते समय
राजनेताओं की आलोचना
करने में डर लगता है.
सोशल मीडिया में भी ढेरों
अनजाने लोग, दोस्ती का हाथ बढ़ाते हैं,
कौन सच्चा कौन झूठा,
क्या हम जान पाते हैं???
ऑनलाइन पेमेंट में भी
डर लगता है।
जहां देखो वही डर है,
हर कहीं डर की आवाज है,
इंसान की हर छुपायी बात
आज मोबाइल का “राज” है!!!
सुलेखा चटर्जी












