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कल्प कथा मंजूषा मंच पर रजत रश्मियों सी सजीं मधु वशिष्ठ की कथाएं।

संवेदना और अनुभव शब्दों का आकार लेकर कहानी बन जाते हैं। – चन्द्रप्रकाश गुप्त चन्द्र बुंदेला

प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज की कृपा से संचालित कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार की संवाद प्रभारी श्रीमती ज्योति राघव सिंह ने बताया कि कल्प कथा मंजूषा मंच पर सूरदास सीही फरीदाबाद हरियाणा की वरिष्ठ कथाकार श्रीमती मधु वशिष्ठ जी की प्रेरक और सकारात्मक कथाएं रजत रश्मियों की तरह सुशोभित हुईं।

दीदी श्रीमती राधा श्री शर्मा के विद्वत मंच संचालन में के कार्यक्रम में मधु वशिष्ठ जी ने आपसी सामंजस्य, परिवार में बुजुर्गों का महत्व, एवं सकारात्मक संदेश से ओत – प्रोत अकेलेपन के एहसास का रिश्ता, व पुरुष ए टी एम और स्त्री मॉडल नहीं होती कथाओं द्वारा भावनाओं के प्रवाह को विस्तार दिया।

समालोचक के रूप में जुड़े अहमदाबाद गुजरात के विद्वान साहित्यकार श्री चंद्रप्रकाश गुप्त चन्द्र बुंदेला ने कार्यक्रम की सफलता पर संतोष प्रकट करते हुए कहा कि संवेदना और अनुभव शब्दों का आकार लेकर कहानी बन जाते हैं।

वहीं बुराड़ी दिल्ली से जुड़ीं समीक्षक श्रीमती भावना भारद्वाज जी ने कहानियों की विषय वस्तु को उद्देश्यपूर्ण बताते हुए कहा कि सच्चे और अच्छे जन हमारे बीच में सदा ही होते हैं जरूरत उन्हें सही समय पर पहचानने की होती है।

कल्पकथा साहित्य संस्था के यूट्यूब चैनल पर सीधे प्रसारण के समीक्षा एवं समालोचना के विशेष प्रारूप के आयोजन में मधु वशिष्ठ जी को कल्प कथा मंजूषा पत्रम से सम्मानित करते हुए उन्हें भविष्य हेतु मंगलकामनाएं प्रेषित की गईं।

कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रगीत वन्दे मातरम् स्मरणोत्सव १५०वें वर्ष में अमर बलिदानियों के सम्मान में वन्दे मातरम् का गायन डॉ श्रीमती जया शर्मा प्रियंवदा जी द्वारा किया गया तत्पश्चात आमंत्रित अतिथियों, सहभागी साहित्यकारों, एवं दर्शकों को आभार प्रकट करने बाद सर्वे भवन्तु सुखिन: श्लोक पाठ के साथ कार्यक्रम को विश्राम दिया गया।

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