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विश्व विकलांग दिवस

बन ना सको आसक्त जनों का
सहारा तो कोई बात नहीं।
है, यह एक शारीरिक कमजोरी
कोई अभिशाप नहीं।

करें सुनिश्चित उनके अधिकारों को
चलो उनको आत्मनिर्भर बनाएं।
जीवन सबका एक सा है क्यों ना,
उनको समाज की मुख्य धारा में लाएं ।

माना थोड़ा विवश हैं वह!
अपनी शारीरिक क्षमता से।
देकर थोड़ा सा आत्मविश्वास,
उनकी प्रतिभा को जगाएं।

आरोग्य देह चाहत सबकी
कमजोरी का मजाक ना बनाएं।
ईश्वर का वरदान हैं सब…..
यह चेतना जन-जन तक फैलाएं।

उर्मिला ढौंडियाल ‘उर्मि’
देहरादून (उत्तराखंड)

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