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गिरता रूपया हमारी साख पर सवाल है।।


विश्व के बाजार में भारत डगमगा रहा है,
डाॅलर हमको दिन में भी तारे दिखा रहा है।
वो हमारा फूंफा टैक्स पर टैक्स लगा रहा है,
रूपया तो यूं सागर की गर्त में जा रहा है।।

विश्व की तीसरी अर्थव्यवस्था का बुरा हाल है,
गिरता रूपया आज़ हमारी साख पर सवाल है।
यहाँ अस्सी करोड़ लोगों का समुह आज भी,
पांच किलो अनाज पर जीवन बिता रहा है।।

जीडीपी तेजी से कागजों में उछल रही हैं,
छोटे उद्योग समापन की कगार पर खड़े है।
विश्व की तीसरी अर्थव्यवस्था होने पर भी,
बेरोजगारी रुकने का नाम नहीं ले रही हैं।।

अर्थव्यवस्था की नीति औंधे मुँह गिर रही हैं,
आरबीआई सवर्ण भंडार के द्वार खोल रही हैं।
हमारी मुद्रास्फीति अब भी शीघ्रता से जारी है,
अर्थनीति धरातल पर धराशायी होती जा रही है।।

विश्व की तीसरी अर्थव्यवस्था होने पर भी,
विश्व बैंक आज़ भारत को सी ग्रेड दे रहा है।
हमारे आर्थिक डाटा का मिलान नहीं हो रहा है,
सुचना के बाद भी भारत सुधार के नहीं भेज रहा हैं।।

विश्व की तीसरी अर्थव्यवस्था होने के बावजूद,
किसानों की आय भी दुगनी कहाँ हो पा रही हैं।
सरकार भ्रष्टाचार पर अंकुश नहीं लगा पायी है,
शेयर मार्केट भी दबाव में कहाँ कदम बढा पाया है।।

सरकार की नजर अर्थनीति सुधार की बजाय,
रेल व तेल को बेचने में सर्वाधिक दिखती रही है।
मन्नू आज़ सरकारी कंपनियां घाटे में जा रही है,
निजी कंपनियों का मुनाफ़ा छलांग लगा रहा है।।


मुन्ना राम मेघवाल।
कोलिया,डीडवाना,राजस्थान।

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