
मन का वह कोना,
सबसे बचाकर,छुपा के रखना।
वह कोना, जहां तुम मन के सुख-दुख,
हंसी आंसू, कभी एकांत में
बैठे दोहराते हो, फिर से जीते हो
और जीवन पा जाते हो।
बड़ा पवित्र होता है वह कोना,
मुखौटा पहनने वालों से उसे बचाना।
सुलेखा चटर्जी

मन का वह कोना,
सबसे बचाकर,छुपा के रखना।
वह कोना, जहां तुम मन के सुख-दुख,
हंसी आंसू, कभी एकांत में
बैठे दोहराते हो, फिर से जीते हो
और जीवन पा जाते हो।
बड़ा पवित्र होता है वह कोना,
मुखौटा पहनने वालों से उसे बचाना।
सुलेखा चटर्जी