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प्रेम की परिभाषा

प्रेम
प्रेम जीवन का आधार बिंदु है।
प्रेम महिमा का अपार सिंधु है।
प्रेम गीत है प्रेम राग है।
प्रेम शांति है प्रेम उत्साह है।
प्रेम आशा है प्रेम विश्वास है।
प्रेम दुख में धीरज का बांध है।
प्रेम में कुछ कर दिखाने का अरमान है।
प्रेम खुले गगन में उड़ने का कमाल है।
प्रेम संगीत राह में मधुर सी तान है।
प्रेम समुद्र के समीप ठंडी हवाओं का एहसास है।
प्रेम दिन भर की थकान में मीठी सी मुस्कान है।
प्रेम झरनों की फुहार है लहरों का बहाव है।
प्रेम हार में भी जीत का अनुभव है।
प्रेम इंद्रधनुष का रंगीन आसमान है।
प्रेम अद्भुत है अपार है प्रेम अनंत तक व्याप्त है।
प्रेम ही जीवन का विस्तार है।
प्रेम स्नेह, त्याग,समर्पण का हृदय स्पर्शी भाव है।

शिखा पाण्डेय
सरायपाली छत्तीसगढ़

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