
उड़ती पतंग मेरी बस हौसले के मंझे से,
ऐसा ये त्यौहार प्यारा अपने के होने से,
तिल गुड़ खाओ और साथ यूंही बनाएं रखना,
हर त्यौहार साथ यूंही आशीर्वाद बनाये रखना।
प्रकृति ने मनुष्य को समझा और,
खुला आसमां और सुंदर दारिया दिया,
एक उड़ान भरनी के लिए जरूरी,
वो पतंग की डोर दी।
मुस्कराहट वो मंकर संक्रांति पर्व की,
हर पल में हर रिश्ते मिलें,
खुशी का नाम है त्यौहार हमारे,
यहीं जीवन का सार बना ।
खुशियां बेशुमार दौलत मिलें,
समृद्धि और सफलता प्राप्त मिलें,
मंकर संक्रांति के पर्व पर आप सबको,
नीतू की मंगल कामनाएं मिलें।
कवयित्री लेखिका -नीतू नागर अम्बर नरसिंहगढ़ मध्यप्रदेश












