
कुछ इश्क़ कहे नहीं जाते, निभाए जाते हैं
कुछ रिश्ते नाम नहीं, सुकून पाए जाते हैं
वो पास हो या दूर, फर्क़ कभी पड़ा नहीं
कुछ लोग दिल में रहकर भी नज़र नहीं आते हैं
मैंने उसे चाहा है, पर बाँधा कभी नहीं
सच्चे मोहब्बतों में हक़ जताए नहीं जाते हैं
उसकी ख़ामोशी में भी एक आवाज़ थी
जो शोर में भी अक्सर लोग सुन नहीं पाते हैं
न वादे माँगे मैंने, न भविष्य का सवाल
कुछ प्रेम भरोसे में ही पूरे हो जाते हैं
वो मेरे साथ न होकर भी मेरे साथ रही
कुछ साये जिस्म छोड़कर भी दिल में छाए जाते हैं
अगर वो मेरी हो जाए तो भी कम न हो
और न मिले तो भी इश्क़ अधूरे नहीं कहलाते हैं
लॉस्टम ये इश्क़ हारने वालों का नहीं
जो बेहतर बना दे, वो इश्क़ हारे नहीं जाते हैं
आर एस लॉस्टम












