
गजक रेवड़ी मूंगफली की खुश्बू आयी
ढोलक डफली झांझर की थाप पर
खुशियों ने ली है अंगड़ाई आंगन में
महक उठी खिचड़ी सौंधी सौंधी।।
उफ्फ ठंडी ठंडी मतवाली चले बयार
गुड़ तिल के लड्डुओं की लगी कतार
धानी चुनर संग सजी मक्के की थाली
गुलाबी गाल खुशियां से भर गया संसार।।
सूरज चाचा की भी बदली बदली चाल
नील गगन को चूमे पतंगे नीली लाल
इंद्रधनुषी रंगों ने लिया खूब जायज़ा
नव उमंग नई उम्मीदों की सजी थाल।।
मूंगफली,तिल,गुड़,चिड़वे,दही के ठाट
संदेश सौहार्द का देती है खिचड़ी
नए नए कृषि चक्र की शुरुआत है खिचड़ी
सूर्य और अग्नि देव का पूजन कर आभार प्रकट करते हैं।।
सरल तीन शब्दों से बनी है खिचड़ी
प्रकाश, हंसी, खुशी और समृद्धि का त्यौहार है खिचड़ी
मकर राशि में सूर्य नारायण का हुआ प्रवेश,
उत्तरायण सूर्य मंडल से धरती सजी।।
स्वरचित रजनी कुमारी
लखनऊ,उत्तर प्रदेश












