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एक अनुभव और सीख बुढ़ापा

आज मेरा ख्याल और विचार उस पल की ओर है जहां जीवन अपनी अंतिम अवस्था में होता है, वहीं एक ओर हमारे अनुभव और सीख के वो मार्गदर्शक रहें हैं वो हैं हमारे “बुढ़े बुजुर्ग ” जिनसे हम हर पल सीखते हैं जीवन में आने वाली कठिनाईयों के लिए तैयार रहते हैं ‌।
आइये देखते हैं की बुढ़े बुजुर्ग किस तरह हमारे जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं,वो न केवल घर की शोभा होते हैं बल्कि हमारे संस्कारों की रेखा होते हैं,वो हमें प्राचीन काल का ज्ञान वा अपने अनुभवों से परिपूर्ण अपने जीवन का सार बताते हैं और हमारे जीवन में एक साथी की तरह साथ देते हैं।

कल के रोज में अपनी नानी के साथ बैठीं थीं तब नानी अपने समय की बात बताने लगी की पहले किस तरह महिलाओं को वो सब सुविधाएं उपलब्ध नहीं थी जो आज हमें उपलब्ध है,पहले महिलाएं 7-9 किलोमीटर दूर से पानी लाती थी, परिवहन अपने पैरों से ही पुरा करती थी,न ठंड के कपड़े, न महावारी के लिए साफ सुथरा माहौल भी नहीं था,इसके अलावा कृषि का कार्य में भी पुरा सहयोग करती थी।वहीं पुरुष भी सभी कामों में व्यस्त रहते थे।
ये सब सुनकर मैं दंग रह गयी आज हमसे एक छोटा सा काम नहीं होता टालमटोल करते रहते हैं। अपने बुढ़े बुजुर्ग का संघर्ष बहुत ही सबक और अनुभव भरा है।जिसको हमें सहेजना और समझना है और एक बेहतरीन समाज परिवार की नींव स्थापित करना है।

आज बुढ़े बुजुर्ग लोगों पर बोझ समझे जाते हैं,पर ये भुल जाते हैं की इन लोगों ने ही हमें आज इस काबिल बनाया की हम खुद को समझ पा रहे हैं आज हम ही अपने बुढ़े बुजुर्ग से खीझ खाते हैं।

हम ये क्यों भूल जाते हैं की हमारा भी बुढ़ापा आयेगा हमारे बच्चे भी हमसे ऐसा ही बरतव करेंगे तब हमें शाय़द उनके दर्द का अनुभव होगा ।जो आप बोओगे वहीं आप कटोगे इसलिए हकीकत को जानकर ही अपना व्यवहार दिखायें।

जब बचपन में आप गिरते हैं तो मां पापा नाना-नानी ने हमें सम्हाला और जब बुढ़ापा होता है तो हम हमारे बुजुर्ग के हाथ छुडवाना चाहते हैं।उनकी देखभाल न करनी पड़े इसलिए वृद्धाश्रम भेजते हैं। हमारी ये सोच ही आपको भी ये दिन दिखायेंगी।
दो लाइन में समां होकर अपने अल्फ़ाज़ आपसे साझा करती हूं

बुढ़े बुजुर्ग है अनुभव हमारे,
हमको जीवन राह बताते,
अंगुली पकड़कर कदम बढ़ते हुए,
हमको मंजिल तक है पहुंचया।

इसलिए कदर करो अपने दादा-दादी,नाना-नानी , पापा मां की ताकि आपके बच्चे भी आपकी कदर करें।
हमारे बुढ़े बुजुर्ग हमारी संस्कृति और संस्कार की सीख और नींव है इसको तरोताजा महफूज़ रखना ही हमारी असली कमाई है।
मैं हाथ जोड़कर विनम आग्रह करती हूं आप अपने बुढ़े बुजुर्ग के होने का महत्व समझें और मेरे द्वारा बताया बातों पर अवश्य गौर करिये। और अपनी समझ से अपने परिवार को एक अच्छा उदाहरण बनें और समाज में भी एक अच्छा उदाहरण छोड़े।

बहुत बहुत धन्यवाद और आभार आपका आशीर्वाद यूंही बना रहे आपकी नीतू नागर

लेखिका कवियत्री नीतू नागर अम्बर नरसिंहगढ़ मध्यप्रदेश

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