
देखो जरा नजर घुमाकर,
होती कितनी अनकही कहानियाँ ,
आस पास अपने कहती जो अपनी जिंदगानियाँ।
देखो कभी नजर भर माँ की फटी एड़ियां,
कहती है वो माँ की मेहनत की अनकही कहानियाँ ,
देखो कभी नयनों को कर नीचा पापा की घिसी चप्पल,
कहती है वो पापा के संघर्ष की अनकही कहानियां।
देखो कभी गाड़ी के शीशे उतार कर फुटपाथ पर कांपते तन को,
कहता हैं वो जीवन के अभावों की सभी अनकही कहानियाँ,
देखो कभी ए सी के शोरूम से बाहर निकल ,
तपते सूरज में जो जोत रहा हल ,
उसके पसीने की बूंदों को,
कहती वो जीवन की कठिनाइयों की सभी अनकही कहानियाँ।
जरा हो समय तो देखना कभी उस सुनी मांग को,
जिसका सिंदूर मिट गया रक्षा में तेरी,
कहती वो जीवन के खालीपन की सभी अनकही कहानियाँ,
थोड़ा सा वक्त निकाल सको अपनी व्यस्तता से,
तो झांकना अपने दिल की गहराईयों में,
कहती वो तुम्हारे अंतर्मन की सभी अनकही कहानियाँ।।
जय माता जी की
विद्या बाहेती महेश्वरी राजस्थान












