
क्या लेकर आए हो, क्या लेकर जाओगे?
इस ज़माने में कब तक साथ निभाओगे?
खाली हाथ आने वाले खाली हाथ ही जाते हैं।
माली बन कर ही उपवन की रक्षा करते जाते हैं।।
कर्मों की लिस्ट में नाम लिखवाया करते हैं।
बेखौफ़ निडरतापूर्वक फ़र्ज़ निभाया करते हैं।।
परोपकारी भावनाओं को मन में बसाओ।
श्रीजी का आशीर्वाद लेने बरसाना जाओ।।
श्रीकृष्ण ने पावन गीता में समझाया।
कर्मों के महत्व को ही महान् बताया।।
माया में अधिक न उलझने वाले सत्य फ़रमाया करते हैं।
स्वयं ही स्वावलंबी बन कर फिर सबके काम आया करते हैं।।
एकाकी बन कर चलना मेरे मन को भाता है।
तन-मन की शुद्धता से ही गहरा मेरा नाता है।।
दानवीर कर्ण की नगरी करनाल से देने की फ़रियाद करती हूँ।
लाडली राधा रानी तथा कान्हा जी के जाप हर पल करती हूँ।।
हे मनुज! क्या लेकर आए हो, क्या लेकर जाओगे?
देने वालों की लिस्ट में कब शुभ नाम लिखवाओगे?
डॉ. ऋचा शर्मा “श्रेष्ठा” करनाल (हरियाणा)












