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अनकहे का सफ़र

एक सच है जो हर रात उतर आता है दिल में,
उसकी परछाईं-सा कोई ठहर जाता है दिल में।

अगर वह मेरी न हुई, यह सवाल बहुत भारी है,
हर उत्तर से पहले एक डर आता है दिल में।

यह प्रेम है या पीड़ा—कभी समझ नहीं पाता हूँ,
बस धड़कन बनकर वह भर जाता है दिल में।

उसके बिना भी उसका होना अजीब सच है,
हर साँस के साथ वही समा जाता है दिल में।

वह दूर चली जाए तो रंग बुझ-से जाएँगे,
हर दृश्य बस याद बनकर रह जाता है दिल में।

मैं समाधान ढूँढूँ भी तो कहाँ तक ढूँढूँ,
कुछ दर्द होते हैं जो रह जाते हैं दिल में।

प्रेम पाने-खोने का हिसाब नहीं माँगता,
यह तो ख़ुद होकर बस जी जाता है दिल में।

लॉस्टम, यह अनकहा कभी ख़त्म नहीं होगा,
वह साथ हो या न हो—रह जाता है दिल में।

आर एस लॉस्टम

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