प्रस्तुत पुस्तक “तलाश:खुद से खुद के दरमियां” संपादक कर्ता नीतू धाकड़ ‘अम्बर ‘जी और उनके सहयोगी कवि प्रशांत सोऊ जी द्वारा, शिवोहम प्रकाशन की सीईओ, प्रतिक्षा गांगुली नाथ जी द्वारा इस पुस्तक के सभी रचनाकारों की रचनाओं को रंग दिये,इस पुस्तक के विचार अपने आप में बहुत महत्व रखते है। इस पुस्तक का नाम मेरे विचारों और जीवन में चलते रहने केअनुभवों से आया है,मैंने अपनी चौबीस साल की उम्र में बहुत कुछ,सीखा है, और साथ ही सफ़र की बहुत सारी चुनौतियों से लड़ते हुए ये पुस्तक को अपने शब्द दे पाई हूं।
खुद की तलाश में ही गुमनाम है हम सब और कभी भी खुद तक पहुंच ही नहीं पाये हम , और वो तलाश पुरी करने के लिए मात्र वो आंखें चाहिये जो आपके अंतर्मन से आपको वो दिखा पाये जो वाकई वास्तविक और प्रामाणिक है।शायद आज हम वर्तमान में जीना छोड़कर या तो भूतकाल की बातों को लेकर परेशान हैं या भविष्य में क्या होगा इसको लेकर गुफ्तगू में लगें हैं, वर्तमान में जीना तो हम भूल ही गए और यही वर्तमान तो आपकी तलाश खुद से खुद में करवायेगा, परन्तु इसके लिए आपको हर समय खुद से वास्तविक दुनिया और ज़िन्दगी में जीना पड़ेगा जोकि हम नहीं करते, और ये मुखौटों को ओढ़े फिरते हैं हर पल ,ऐसे में तलाश खुद की नहीं हो पायेगी।मैंने दर्शनशास्त्र में बहुत सारे विचारकों की विचारधारा पड़ी है। और निष्कर्ष सबका यही है की तलाश खुद की करना , स्वयं को देख पाना, स्वयं को समझ पाना, मंजिल नहीं सफ़र का आंनद लेना, यहीं सार है
इस पुस्तक के बेहतरीन को-राइटरर्स के नाम इस प्रकार हैं:-
प्रशांत सोऊ जोधपुर राजस्थान,वृंदा वाणी,सुखेन्द्र कुमार माथुर,कंचन श्रीवास्तव आरज़ू,भावना मोहन विधानी अमरावती,अयांतिकादास,सुरिंदर कौर,जगदीश प्रसाद गबेल,अतुल किशोर शाही,अवि ठाकुर,किरण बाला,राजू धाकड़ (सरल),डॉ.बी एल सैनी, आरती विश्वकर्मा,अविनाश,डॉ.रुपाली गर्ग,अक्षिका अग्रवाल,पूनम गुप्ता ‘पूर्वी ,श्री महेंद्र कुमार मिठारवाल, मृत्युंजय त्रिपाठी मलंग,सूर्यपाल नामदेव,रवेन्द्र पाल सिंह ‘रसिक’,अमिता सिंह,आशा,सोनिया सरीन’ साहिबा,
पंडित मुल्कराज ‘आकाश ,डॉ.संजीदा खानम शाहीन,मुन्ना लाल मेघवाल, मोरध्वज पटेल,प्रीति कुमारी,सावित्री मिश्रा,श्रैया
संपादक नीतू नागर अम्बर नरसिंहगढ़ मध्यप्रदेश
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