Uncategorized
Trending

हर झलक में तुम

हर जगह, हर मोड़, हर मंज़र में तुम,
धूप में, छाँव में, हर लम्हे भर में तुम।

हवा जब भी चली, कुछ कहकर गुज़र गई,
शायद उसी ख़ामोश इशारे में तुम।

रातें अब सिर्फ़ अँधेरा नहीं रहीं,
मेरी नींदों की हर करवट में तुम।

मैं कुछ कहूँ भी तो शब्द साथ नहीं देते,
मेरी चुप्पी की हर गहराई में तुम।

नज़रों ने देखा, दिल ने महसूस किया,
बिना छुए ही हर एहसास में तुम।

सोचा था भूलना आसान होगा कभी,
पर हर सोच की पहली आदत में तुम।

अगर क़िस्मत ने हमें दूर ही रखा,
तो क्या—मेरी हर साँस की ज़रूरत में तुम।

यह प्रेम पाने की शर्तों में क़ैद नहीं,
मेरे भीतर जलती हर आग में तुम।

रूपेश अब किसी अंजाम से डरता नहीं,
क्योंकि अधूरेपन की भी इबादत में तुम।
आर एस लॉस्टम

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *