भीतर का भरोसाभीतर का भरोसा आपका दृढ़ संकल्प है।भावनाओं के विकास में नहीं कोई विकल्प है।।

भीतर का भरोसा भाग्य जगाता है।
अंतर्मन में खुद की तैयारी करवाता है।।
आंँधियों से हमें बचना सिखाता है।
आत्मशक्ति के बल पर जीना सिखाता है।।
भीतरी ताकत होती है सबके पास।
बस प्रयोग करते हुए बनना होता है खास।।
कोई करता सदुपयोग और पूरी होती है अरदास।
तो कोई दुरूपयोग करते हुए नहीं पूरी कर पाता आस।।
अंदरूनी भेद सभी को बताए नहीं जाते।
कुछ से छिपाए तो कुछ के समक्ष रखे जाते।।
रहस्यमयी बातों को लेकर पक्ष-विपक्ष बहुत होते।
इंसान सामने कुछ तथा पीठ पीछे कुछ और ही होते।।
भीतर का भय अक्सर हमें डराता है।
निडर बन कर चलने की सजा पाता है।।
आत्मविश्वास की कीमत नहीं कोई समझ पाता है।
गिरने-गिराने में लगा हुआ मानस बहुत इतराता है।।
हार की राह पर निरंतर आगे बढ़ा कीजिए।
मत कभी भी किसी की परवाह किया कीजिए।।
जीत हासिल हो जाने पर भी प्रशंसा में मत उलझा कीजिए।
हार-जीत के चक्कर में आप अधिक मत पड़ा कीजिए।।
अंत में भीतर का भरोसा इस भूमि पर सदा जगमगाता रहे।
भगवान् के आशीर्वाद से भक्त अपना भविष्य चमकाता रहे।।
शिक्षिका, कवयित्री, लेखिका, समाजसेविका-
डॉ. ऋचा शर्मा “श्रेष्ठा” करनाल (हरियाणा)












