
बसंत आया द्वार हमारे,
हँसी बिखेरी दिशाएँ सारी।
पीले रंग में रंगी हुई,
धरती लगी नई-नई प्यारी।
ठंडी हवा अब थम सी गई,
सूरज की किरणें मुस्काईं।
हर आँगन में आशा जगी,
नव उमंगों ने राह दिखाई।
सरसों के खेत लहराने लगे,
मानो सोना झर-झर जाए।
आम की डाली बौर सजी,
मन में मधुर सपने जग जाएँ।
कोयल की बोली गूँज उठी,
पवन बजाए मधुर तराना।
प्रकृति लिखे नव जीवन गीत,
हर हृदय बने मुस्काना।
आज विद्या की देवी आईं,
वीणा जिनके कर में शोभे।
ज्ञान का दीप जलाकर माँ,
अज्ञान का अंधकार धोए।
चलो प्रण लें इस पावन दिन,
सत्य और श्रम को अपनाएँ।
विद्या, कला और संस्कार से,
जीवन को सुंदर बनाएँ।
बसंत पंचमी का यह पर्व,
दे नई दिशा, नई पहचान।
ज्ञान, प्रेम और शांति से,
महके सारा हिंदुस्तान।
नाम-पल्लवी पटले जिला-सिवनी मध्यप्रदेश












