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पुरुषोत्तम

आज अयोध्या में श्रीराम हरि बनके बिराजे हैं,
पावन बहती सरयू की धारा क्या कलोल करती होगी।

कण-कण में गूँज उठा है नाम रघुनंदन का,
हर श्वास आज भक्ति की सुगंध भरती होगी।

पुरुषोत्तम के चरणों में बिछे हैं सनातन भाव,
शताब्दियों की प्रतीक्षा आज पूर्ण होती होगी।

घंटों-शंखों के नाद में जाग उठा इतिहास,
हर ईंट कथा बनकर स्वयं कहती होगी।

राजमहल नहीं, मर्यादा का सिंहासन है यह,
जहाँ करुणा ही सबसे बड़ी शक्ति होती होगी।

वनवास की पीड़ा भी आज नमन करती है,
धैर्य की हर परीक्षा सार्थक होती होगी।

एक बार आओ अयोध्या, देखो राम को,
तेरा जीवन स्वयं को धन्य मानती होगी।

आर एस लॉस्टम

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