
पावन दिवस है बाईस जनवरी ,
घर में राम पधारे !
विजई हुआ ये सत्य सनातन,
धन्य हुए भाग्य हमारे !!
बंदी बना दिया पटना में,
अवध में गोली चलवाई !
धिक्कार तुम्हें छद्मवेशियों,
क्या लाज तुम्भें ना आई !!
लाल हुआ सरयू का पानी,
माँ का कोख उजाड़ दिया !
मानवता हो गई कलंकित,
छलना का मनुहार किया !!
सत्य सनातन की रक्षा में,
लाखों नें जान गंवाई!
कितनी सदियाँ बीत गई तब,
मंगलमय बेला आई!!
कमर कसो ऐ देशवासियों,
ऐसा दिन फिर ना आए !
सत्तालोलुप गद्दारों का,
अब दाल न गलने पाए !!
‘जिज्ञासु’ जन गण अधिनायक,
कलुष कूट संघारें !
सत्य अहिंसा स्नेह शांति से,
भूषित भाव संवारें !!
राम-राज्य स्थापित करना,
हों संकल्प हमारे!
दुख दरिद्रता मिट जाए हों,
स्वस्थ सुखी जन सारे !!
पावन दिवस है बाईस जनवरी ,
घर में राम पधारे !
विजई हुआ ये सत्य सनातन,
धन्य हुए भाग्य हमारे !!
रचनाकार- नंदकिशोर गौतम (माध्यमिक शिक्षक)
शास. उच्च.माध्य. विद्यालय बकोड़ी, ब्लॉक कुरई, जिला सिवनी म. प्र.












