
ज्ञान की देवी– माँ सरस्वती के आशीर्वाद से हम हर पल मुसकुराएँ और कठिन परिश्रम करते हुए निरंतर अग्रसर होते जाएँ……
हे माँ सरस्वती! हमें ज्ञान प्रदान कीजिए।
हे माँ शारदे! भक्त को वरदान दीजिए।।
शब्दों की अधिष्ठात्री देवी! शब्दों के भंडार दीजिए।
लेखनी को श्रेष्ठ बनाकर बुद्धि को विस्तार दीजिए।I
अंतर्मन की भावनाओं को सकारात्मक ऊर्जा दीजिए।
सुंदर रचनाएँ लिख सकूँ, कलम की धार तेज़ कीजिए।।
आपकी साधना और वंदना प्रत्येक पल करूँ।
ऐसे नेक कार्यों का ही श्रीगणेश मैं हरदम करूँ।।
मन के उद्गारों का ही उद्घाटन हर क्षण करूँ।
कठिन परिश्रम की ही भावनाएँ धारण करूँ।।
आपके कर-कमलों का आशीर्वाद हो हमें प्राप्त।
प्रेम और प्रेरणा के भंडार ही चारों ओर हों व्याप्त।।
कबीर, सूरदास, तुलसी जैसे संतों का भी मान मैं बढ़ाऊँ।
उनके द्वारा दिखाए सुमार्ग पर तीव्रता से बढ़ती जाऊँ।।
बसंत पंचमीके पावन तथा विशेष पर्व की महिमा मैं गाऊँ।
निज भारतीय संस्कारों और संस्कृति के परचम लहराती जाऊँ।।
शिक्षिका, कवयित्री, लेखिका, समाजसेविका- डॉ. ऋचा शर्मा “श्रेष्ठा” करनाल (हरियाणा)












