
आज लिखी है चिट्ठी मैने
सांवरे बादल के नाम
कर सकते हो क्या तुम मेरा
बस छोटा सा एक काम
एक दोस्त है दरिया मेरा
सूख गया है जिसका जल
है उदास वो इसी बात पर
रोता रहता है हर पल
लेकर जल तुम संग हवा के
क्या दरिया तक जाओगे
भर जाये वो फिर से पूरा
इतना जल बरसाओगे
आज लिखी है चिट्ठी मैने
सांवरे बादल के नाम
कर सकते हो क्या तुम मेरा
बस छोटा सा एक काम
ये जो खेत सखा हैं मेरे
दुखड़ा मुझे सुनाते हैं
सूख गयी हैं फसलें उनकी
तुमको रोज बुलाते हैं
खत मिलते ही क्या तुम मेरा
उड़कर उन तक जाओगे
जल बरसा कर उन खेतों में
उनकी प्यास बुझाओगे
आज लिखी है चिट्ठी मैने
सांवरे बादल के नाम
कर सकते हो क्या तुम मेरा
बस छोटा सा एक काम
जिन पेड़ों की छाँव खेलकर
फल खाकर बीता बचपन
उनके पीले पत्ते देखे
भर आया था मेरा मन
क्या धरकर तुम रूप सांवला
इतना जल बरसाओगे
उन पेड़ों को एक बार फिर
हरा भरा कर जाओगे
— रचनाकार
राकेश मणि त्रिपाठी












