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23 जनवरी नेताजी की जयंती


नेताजी की जयंती को नमन है
बसे जो,हमारे तन मन मे है
भूले न भूलेगे ये देश उन्हे
जो आजादी के मतलब सीखा गये हमे
देश को गुलामी की जंजीरो से मुक्ति हेतु
वृहद भारत के थे वे एक सेतु
सबो के भीतर आजादी का बिगुल बजाया
बिखरे,उजड़े लोगो को मिलाया
देश ये हमारा है,का दिया नारा
भगाओ गोरो को,एक दुजे का बनकर सहारा
एकता बनाओ,शक्ति बढ़ाओ
हरेक घर से क्रान्ति का मशाल जलाओ
शांति नही अशांति फैलाओ
अहिंसा नही अब,हिंसा फैलाओ
हाथ जोड़े नही,तोडे हाथ
जैसे भी हो,जो भी हो मिलाओ हाथ
लेकीन इन गौरे चमड़ी वालो को भगाओ
देश को इनसबो से आजादी दिलाओ
नेताजी ने सबो के भीतर भाव जगाने
आजादी को खड़े किये लाखो दीवाने
हर एक ओर से गूंजने लगे नारा
जयहिन्द के साथ दिल्ली चलो का लिया सहारा
आवाज नेताजी के सुनकर पूरे देशवासी
आजाद होने हेतु, कमर कसी
अब तो आजादी पाकर ही रहेंगे
भले इस हेतु खून क्यों न बहायेगे?
ऐन वक्त पर नेताजी सुभाष चंद्र ने
आजाद हिन्द फौज लाया सबके सामने
बनाकर अपना एक सशक्त सेना
सबो से कहा,बाते मेरी ध्यान से सुनना
इस आजादी के क्रांति मे ,मै साथ दूंगा
तुम मुझे खून दो,मै तुम्हे आजादी दिलाऊगा
बस,क्या था? इस नारे ने ऐसी पकड़ी जोर
हम है खून देने का आवाज हुआ चहुंओर
सारे के सारे देशवासी ,हुए तैयार
आजादी तो हर हाल मे चाहिए इसबार
अंततः सबके मेहनत रंग आने लगी
देश मे आजादी के संकेत आने लगी
उसी वक्त कुछ अनसुलझी घटी घटना
नेताजी रहे या ना रहे से हुआ सामना
किसी ने आकस्मिक मौत मानी
तो,किसी न रहस्यमयी बताई कहानी
वस्तुतः,हमारे बीच नेताजी नही थे
जी सच मे,अब हमारे साथ नही ही थे
शौक की लहर मे डूबे पूरे हिन्दुस्तान
खो दिया,हमने एक सच्चे वीर जवान
आधिकारिक पुष्टि तो सब स्वीकारते है
लेकीन वास्तविक जानकारी भी तो,हम चाहते है
कि,,वो घटना के बाद ही वो हुए लापता है
फिर कही देखा न देखा,रहस्य पता है
आज ,23 जनवरी को उनके जयंती पर
देश याद करते है सर झूकाकर
कि,वृहद भारत को एकरूपता दिलाने वाले
एकलौता जवान थे,हमसे दिलो मे राज करने वाले
पुनः,दिल से नमन करता हूँ
नेताजी सुभाषचंद्र बोस को याद करता हूँ

चुन्नू साहा पाकूड झारखण्ड

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