
तुम वीर थे, तुम धीर थे, तुम क्रांति की मशाल थे,
आजाद हिंद के स्वप्न में, तुम हिंद के लाल थे।
नारा दिया था जोश में— “तुम मुझे खून दो”,
हम आज भी न भूलें हैं, उस गूँजती आवाज़ को।
वर्दी तुम्हारी आन थी, टोपी तुम्हारी शान थी,
आँखों में जलती देश की, आजादी की मुस्कान थी।
पर्वत लांघे, सागर चीरे, दुश्मन को ललकार दिया,
तुमने सोई हुई कौम को, जीने का आधार दिया।
दिल्ली चलो की हुंकार से, थर्रा उठा था आसमान,
जय हिंद के उस मंत्र से, जागी भारत की संतान।
प्रणाम उस फौलाद को, जिसने झुकना सीखा नहीं,
सुभाष जैसा शूरवीर, दुनिया में दूजा कोई नहीं।
रीना पटले,शिक्षिका
शास हाई स्कूल ऐरमा, कुरई
जिला – सिवनी मध्यप्रदेश












