
जाड़ों का मौसम और सुहानी धूप खिले हुए चेहरों को भाती है।
ऊनी कपड़ों की भरमार प्रत्येक घर में खूब देखी जाती है।।
ठंडी-ठंडी सर्द हवाएँ सबके यहाँ शुभ संदेश पहुँचाती हैं।
गर्म मिज़ाज वालों को भी शीतल कर दिखलाती हैं।।
गरमागरम हलवा-पूरी के पकवान खूब चखाती हैं।
ओस की बूँदें तथा सुहानी धूप आनंद बड़े दिलाती हैं।।
शीतकालीन अवकाश में घूमने के कार्यक्रम बनते हैं।
गरमी में हिमाचल तो सरदी में राजस्थान जचते हैं।।
गरम-सरद के आपसी तालमेल सुंदर बहुत लगते हैं।
इस प्रकार जाड़ों के मौसम और सुहानी धूप सजते हैं।।
भोर में जागते ही चाय की प्याली हाथों में आ जाती है।
तुलसी-अदरक वाली चाय पीते ही सुंदर रचना बन जाती है।।
कोई भी कवयित्री या लेखिका समाज की भलाई चाहती है।
जाड़ों के मौसम और सुहानी धूप विषय पर लिखती जाती है।।
जुराबों से लेकर सिर की टोपी तक विभिन्न वस्त्र चमकते हैं।
सरदी के खूबसूरत मौसम में ही कपड़ों के भंडार दिखते हैं।।
गाजर, साग, पालक आदि के स्वाद ही स्वास्थ्य ठीक रखते हैं।
काजू-बादाम इस माह खूब खाने पर वर्ष भर तंदुरुस्त रखते हैं।।
अंत में जाड़ों का मौसम और सुहानी धूप सभी को मुबारक।
आने वाले गणतंत्र दिवस की शानदार तैयारी सबको मुबारक।।
-डॉ. ऋचा शर्मा “श्रेष्ठा” करनाल (हरियाणा)












