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वक्त कैसा भी हो

वक्त कैसा भी हो
वक्त कैसा भी हो
राही आपना कर्म , करता चल।
अच्छे वक्त में अपने आपको,
अहंकार के सागर में न डुबो।
बुरे वक्त में, अपने धैर्य के
बाण को टूटने न दे।
वक्त जरूर बदलेगा
चाहें अच्छा हो या बुरा
बुरे वक्त में अपनी हार
का विकल्प चुनने की
गलती न कर।
सदैव जीत और अच्छाई
की राह पर चलने का
संकल्प मन में कर।
डगर कितनी भी कठिन हो
उस प्रकृति की ओर देख,
रात के काले अंधेरे में
भोर की आशा लिए
आकाश के तारों से
दोस्ती कर,आशा की
किरन क्षितिज पर
लालिमा बिखेरती
नजर आती है।
किसी के गलत व्यवहार से
तू विचलित न हों,
साथ ही किसी के प्रति
गुस्से को नफरत में
में बदलने की कोशिश न कर
उसे अपने शब्दों में
अभिव्यक्त कर,
मन में कड़वाहट का
विषैला बीज न बो।
बुरा वक्त और बुरे लोग
बहुत कुछ सिखा जाते है
इंसान को अपनी पीठ
नहीं दिखती,वो दर्पण बन
हर बात बता और सीखा जाते है।
बुरा वक्त और बुरे व्यक्ति ही तो
अपने और पराए का भेद करने का हुनर भी तो मुहैया कराते है।

डॉ परवीन शेख

महाराष्ट्र

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