Uncategorized
Trending

कहानी :फूल और भंवरा

एक चांदनी रात से सजे उस जादुई बाग में, जहां हर पत्ता प्रेम की सांस लेता था और हवाएं दिलों की धड़कनों को गुनगुनाती थीं, वहां खड़ा था एक परसा का पेड़। उसके फूल लाल रंग के, जैसे किसी आशिक की आंसुओं से रंगे हुए, जलते हुए जज्बातों की लौ। उनमें से एक फूल था – सबसे नाजुक, सबसे गहरा, जिसकी हर पंखुड़ी में छिपी थी एक अनकही पीड़ा, एक अनंत इंतजार। वह फूल रोज सूरज की पहली किरण से खिलता, लेकिन उसके दिल में बसता था एक खालीपन, एक ऐसी तन्हाई जो रातों को और लंबी कर देती, जहां वह चुपचाप रोता, किसी साथी की याद में। “कब आएगा वो,” वह फूल सोचता, “जो मेरी आत्मा को छूकर मुझे जीवित कर दे?”

एक शाम, जब आकाश में तारे टिमटिमा रहे थे और हवा में प्रेम की महक घुली हुई थी, एक भंवरा उड़ता हुआ आया। उसके पंखों में दर्द की कहानियां थीं, उसके गुनगुनाहट में छिपी थी एक लंबी यात्रा की थकान। वह दुनिया भर घूम चुका था, लेकिन कहीं सुकून नहीं मिला। जैसे ही उसकी नजर उस परसा के फूल पर पड़ी, उसका दिल धड़क उठा – जैसे कोई पुरानी याद जाग गई हो। “ओ मेरी जिंदगी,” भंवरे ने कांपती आवाज में गुनगुनाया, “तुम्हारी महक ने मुझे घर बुला लिया है। क्या मैं तेरे दिल में उतर सकता हूं, जहां सिर्फ हम दोनों हों?” फूल की आंखों में आंसू छलक आए, पंखुड़ियां थरथराईं, मानो कह रही हों, “आओ, मेरे प्रिय। मैंने तुम्हारे लिए ही ये साल गुजारे हैं, ये तन्हाई सही है। अब हम एक हो जाएंगे।”

भंवरा करीब आया, उसके स्पर्श से फूल का पूरा वजूद कांप उठा – जैसे कोई जख्म भर रहा हो, जैसे कोई सपना सच हो रहा हो। उसने अमृत चूसा, लेकिन वह अमृत नहीं था; वह था उनके दिलों का मिलन, जहां हर बूंद में छिपी थी अनंत भावनाएं – प्रेम की मिठास, अलगाव की पीड़ा, और मिलन की वो खुशी जो आंसुओं में घुल जाती है। वे रात भर बातें करते: भंवरा अपनी यात्राओं की दर्द भरी कहानियां सुनाता, कैसे वह हर फूल में उसे ढूंढता रहा; फूल अपनी रातों की उदासी बांटती, कैसे हर हवा में उसकी गुनगुनाहट सुनती रही। हर सुबह भंवरा लौटता, फूल की पंखुड़ियों पर आंसू गिराता, चुंबन बरसाता। वे एक-दूसरे में इतना खो जाते कि दुनिया भूल जाती – सिर्फ उनका प्रेम, उनकी धड़कनें, उनकी सांसें। “तुम बिन मैं अधूरा हूं,” भंवरा कहता, और फूल रोते हुए जवाब देती, “तुम्हारे बिना ये जीवन व्यर्थ है।”

लेकिन प्रेम की परीक्षा आती है, और एक रात आया वो भयानक तूफान – हवाएं चीख रही थीं, जैसे ईर्ष्या कर रही हों उनके मिलन से; बारिश की बूंदें तीरों सी चुभ रही थीं, जैसे उनके दिलों को चीर रही हों। भंवरा उड़ नहीं सका, लेकिन वह फूल की पंखुड़ियों के नीचे दुबक गया, कांपते हुए बोला, “डरो मत, मेरी जान। ये तूफान गुजर जाएगा, लेकिन हमारा प्रेम हमेशा रहेगा। मैं तुम्हें कभी नहीं छोड़ूंगा, चाहे मौत आए।” फूल की पंखुड़ियां झड़ने लगीं, हर गिरती पंखुड़ी में छिपी थी एक याद, एक पीड़ा। वे रोते रहे, एक-दूसरे को थामे, दिलों की धड़कनों से कहते, “ये दर्द भी मीठा है, क्योंकि ये तुम्हारे साथ है।” तूफान गुजर गया, लेकिन उनके दिलों में वो रात हमेशा के लिए बस गई – एक सबूत उनके अटूट प्रेम का।

समय बीता, मौसम बदले, लेकिन उनका मिलन कभी फीका नहीं पड़ा। हर बसंत में भंवरा लौटता, फूल खिलता, और वे फिर से जी उठते – अधिक गहराई से, अधिक भावुकता से। क्योंकि सच्चा प्रेम आंसुओं से सींचा जाता है, पीड़ा से मजबूत होता है, और मिलन में अमर हो जाता है। वह फूल और भंवरा अब प्रकृति की वो कविता हैं, जहां हर शब्द में छिपी है एक भावना, एक आंसू, एक मुस्कान – हमेशा के लिए।

लेखक
“कौशल”

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *