
मेरा इश्क़ है तिरंगा, मेरी जान है तिरंगा।
मेरा कर्मा है तिरंगा, मेरा ईमान है तिरंगा।
लफ्ज़ों में बयां ना हो, ऐसा महान है तिरंगा।
जान से भी प्यारी, मेरा अभिमान है तिरंगा।
देश के खातिर मर जाऊं तो बन जाए ये मेरा लबादा।
मोहब्बत करूं तिरंगे को अपने जान से भी ज्यादा।
ढाल बनकर करूं मैं रक्षा, तिरंगे की करूं सुरक्षा।
दुश्मनों को मार गिराऊं, है मुझमें इतनी दक्षा।
तीन रंगों से बना तिरंगा केसरिया, सफेद और हरा।
तीनों रंगों से बल है मिलता,तीनों रंगों से ढका धरा।
सदा ऊंचे में ही लहराए, मेरे प्यारे भारत का तिरंगा।
करें सब मिलकर प्रतिज्ञा, दिलों में बहे प्रेम की गंगा ।
अनिता महेश पाणिग्राही
सरायपाली छत्तीसगढ़












