
हौसलों की उड़ान हम सभी को भरनी चाहिए।
सकारात्मक ऊर्जा संग कोशिश करनी चाहिए।।
हौसलों की उड़ान से ही बढ़ते हैं सदा हम।
असफलताओं की छाँव को छोड़ते हैं हम।।
हर कठिनाई में छिपा हुआ सुनहरा अवसर होता है।
सपनों की दुनिया को हकीकत में बदलना होता है।।
डर को पीछे छोड़ कर ही हम आगे बढ़ते हैं।
अँधेरे से लड़कर ही प्रकाशित राहें चुनते हैं।।
आसमान की बुलंदियों को छूना है हमें।
कदमों में विश्वास लिए आगे बढ़ना है हमें।।
हर गिरावट सिखाती है उड़ना दोबारा।
संघर्ष से ही मिलता है जीने का सहारा।।
निराशा की दीवारें हमेशा तोड़ देते हैं हम।
हिम्मत के पंख लगाकर सपनों में उड़ते हैं हम।।
असंभव को भी संभव करने की चाह रखते हैं हम।
हौसलों की ताकत से ही नवीन सुंदर राहें रखते हैं हम।।
जो ठान लें उन्हें कोई रोक नहीं सकता।
सपनों की उड़ान में आकाश भी छोटा लगता।।
हर चुनौती को हँसकर स्वीकार करते जाओ।
हौसलों की उड़ान से ही सफलता पाओ।।
हौसलों की उड़ान भरने वाली कवयित्री-
डॉ. ऋचा शर्मा “श्रेष्ठा” करनाल (हरियाणा)













