
विधा- कविता
शीर्षक- बसंत और होली का मधुर संगम
सरसो के फूलों से धरती लहलाई,
प्रकृति की ये सुंदरता हैं सबको भाई l
खिल उठी धरती की सभी क्यारिया,
बसंत के साथ आ रही हैं फागुन की किलकारिया ll
आम के पेड़ों में मौर आई,
कोयल ने भी मीठी तान सुनाई l
पतझड़ के बाद नये पत्तो की चादर ओडे,
धरती माता आनंद में डोले ll
पलास के पेड़ों में देखो,
लाल गुलाबी फूल हैं आये l
हर्ष, उल्लास और नव जीवन ,
ले आई यह ऋतु का स्पंदन ll
बसंत ऋतु हैं ऋतुओं का राजा,
चारों ओर बाज रहा है हर्ष का बाजा l
पीली चादर ओडे हैं धरती,
कोयल मधुर तान हैं भरती ll
अंग-अंग में उल्लास जगाती,
फागुन की मस्ती रंगो संग आती l
रंग-बिरंगे फूल खिले हैं,
देखो गगन में सतरंगी रंग मिले हैं ll
रचनाकार- नंदकिशोर गौतम ( माध्यमिक शिक्षक)
शास. उच्च. माध्य. विधालय बकोडी, ब्लॉक कुरई, जिला सिवनी म. प्र.













