
विधा- कविता
शिव ही सत्य,शिव ही सुन्दर है
सृष्टि का करता पालन शिव ही सृजनहार है
शिव ही अजय ,अमर संन्यासी है
शिव ही अविनाशी शिव ही कैलाशी है
शिव ही नश्वर है शिव ही आत्मा है
सब में बसा शिव ही परमात्मा है
शिव ही सत्य सनातन का आधार है
शिव ही रूप भयंकर महाकाल है
शिव ही बोला शिव भंडारी है
मुरादें करता सबकी पूरी शान अनुरागी है
सत्यम् शिवम् सुदरम् में छुपा जगत सार है
शिव ही शंशाक शेखर सृष्टि का मूलाधार है
प्रिया काम्बोज प्रिया
सहारनपुर उत्तर प्रदेश स्वरचित रचना













